गुणगान आपका


कैसे करूँ गुणगान आपका
कैसे करूँ गुणगान आपका

संताप पाप से हमें बचाया
अंतर पावन रूप दिखाया
पाप-पुण्य का बोध कराकर
धरम संकट से हमें बचाया

जीवन मरण का भेद बताकर
ज्ञान रस हमको पिलाकर
ध्यान रस को हमें चखाकर
अमृत रस सा भान कराया

अँधेरा मन का घटाकर
जन्म-मरण का बंध छुड़ाकर
पाप-ताप से हमें बचाया
अंतर पावन रूप दिखाया
पाप-पुण्य का बंध छुड़ाकर
मुक्त पदवी मान दिलाया

जीवन मरण का भेद बताकर
ज्ञान रस हमको पिलाकर
ध्यान रस को हमें चखाकर
अमृत का सा भान कराया

अँधेरा मन का घटा कर
ज्ञान प्रकाश में हमें बिठाकर
दूर किये सब भ्रम और भ्रान्तीयाँ
ऐसा हमें पारस बनाया

जंजीरों को भस्म कर दिया
सूर्य रूप का बोध कराया
मुक्त कराया और आत्मा में
परमात्मा को दिखलाया

हे गुरूजी, हे मेरे दाता
सच्चे पथ के तुम हो प्रदाता
सत्य की रोशनियों से उज्जवल  
मेरा मन, मेरा जीवन सारा

कैसे करूँ गुणगान आपका
कैसे करूँ गुणगान आपका 

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